भारत की टॉप 7 महिला IPS अधिकारी

आज के भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और निजी से लेकर सरकारी विभाग में अपनी पहचान बना रही हैं. भारत में IPS के तौर पर काम करने वाली महिलाओं को बहुत बड़ी चुनौतियों से गुजरना पड़ता है.

इसके बाद भी उन्होंने अपनी वीरता से कई बड़े कामों को अंजाम दिया है. आज हम आपको भारत की उन शीर्ष महिला IPS अधिकारियों के बारे में बता रहे हैं जो आज सभी के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं.

किरन बेदी एक सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वो साल 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुईं थी और भारत की पहली महिला IPS अधिकारी बनी थीं.

साल 2007 में उन्होंने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के महानिदेशक के साथ ही स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली. बता दें कि वह दिल्ली में जेल इंस्पेक्ट जनरल के तौर पर तैनात रहीं, इस दौरान उन्होंने तिहाड़ जेल में कई सुधार किये. साल 1994 में उन्हें रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

अर्चना रामासुंदरम साल 1980 बैच की IPS अधिकारी हैं. IPS में चयनित होने से पहले वो एक लेक्चर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. पुलिस सेवा में आने पर उन्हें तमिलनाडु कैडर आवंटित किया गया. उन्होंने एसपी (प्रोहिबिशन एनफोर्समेंट विंग) के तौर पर भी काम किया है.

साल 1995 में उन्हें सराहनीय कार्य के लिए पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया था. 3 फरवरी 2016 को उन्होंने सशस्त्र सीमा बल के महकनिदेशक के रूप में उन्होंने पद भार संभाला और भारत में अर्धसैनिक बलों की कमान संभालने वाली पहली महिला बनी.

साल 1981 में मीरा बोरवणकर महाराष्ट्र कैडर की IPS अधिकारी बनीं और मुंबई में पुलिस उपायुक्त के रूप में नियुक्त हुईं. साल 1993-95 में उन्हें राज्य सीआईडी क्राइम ब्रांच में तैनात कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने मुंबई की सीबीआई में आर्थिक अपराध शाखा में काम किया.

साल 2001 में मीरा मुंबई की क्राइम ब्रांच विभाग की पहली मुखिया बनीं. पुलिस मेडल और महानिदेशक के सम्मान के साथ ही उन्हें शानदार योगदान के लिए साल 1997 में राष्ट्रपति पदक भी दिया गया.

सजुक्ता पराशर साल 2006 बैच की IPS अधिकारी हैं. उन्होंने नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया किया है और इसके बाद परास्नातक की पढ़ाई, एम. फिल और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया. उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में पूरे भारत में 85वीं रैंक हासिल की थी.

साल 2008 में मकुम में सहायक कमांडेंट के रूप में तैनात किया गया था. इसके बाद जल्द ही उन्हें बोडो और अवैध बांग्लादेशी उग्रवादियों के बीच हुए संघर्षों के नियंत्रित करने की जिम्मेदारी दी गई. इस काम में उन्होने 15 महीनों में 16 आतंकियों को ढेर कर दिया, साथ ही 64 से ज्यादा को गिरफ्तार किया.

इसी के साथ ही हथियार और गोला-बारूद भी बारमद किया. अलगाववादी विद्रोहियों के खिलाफ मुकाबला करने के लिए उन्होंने असम के जंगलों में अपनी टीम का नेतृत्व किया और कई मौकों पर अपनी जान को जोखिम में डाला.

सोनिया नारंग साल 2002 बैच की महिला IPS अधिकारी हैं. उन्होंने साल 1999 में पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक किया. उन्हें अपराध जांच विभाग (सीआईडी) में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) के तौर पर पदोन्नत किया गया था. उन्हें एक जिम्मेदार अधिकारी के तौर जाना जाता है.

उन्होंने एक मौके पर लाइन क्रॉस करने पर एक राजनेता को थप्पड़ मार दिया था. इसी के साथ ही उन्होंने लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के घोटाले का पर्दाफाश किया था. उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) नई दिल्ली में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया गया है.

कंचन चौधरी पहली महिला अधिकारी थी, जो किसी राज्य की पहली पुलिस अधीक्षक बनी. वे अपने पद से 31 अक्टूबर 2007 को सेवानिवृत्त हुईं. किरण बेदी के बाद वो देश की दूसरी महिला IPS अधिकारी थीं और राज्य की डीजीपी बनने वाली पहली महिला थी.

साल 1989 में उन्हें लंबी सराहनीय सेवाओं और साल 1997 में प्रतिष्ठित सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया. साल 2004 में उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें राजीव गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसी के साथ ही साल 2004 में उन्हें कैनकन, मेक्सिको में आयोजित हुई इंटरपोल की बैठक में उन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था.

डॉ. बी. संध्या भारत में केरल पुलिस की अतिरिक्त महानिदेशक हैं. उन्होंने साल 1998 में वोलांगोंग विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया से मानव संसाधन प्रबंधन में प्रशिक्षण लिया. साल 2006 में उन्होंने केरल के पूर्व लोक निर्माण मंत्री पी.जे. जोसेफ के खिलाफ लगाए गई यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की. साल 2009 में उन्होंने जन्मैईत्री सुरक्षा प्रोजेक्ट का काम किया.

साल 2010 में अमेरिका में मौजूद इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ महिला पुलिस ने संध्या को इंटरनेशनल स्कॉलशिप ऑफ डिसटिंक्शन से सम्मानित किया. उन्हें सराहनीय सेवाओं के लिए साल 2006 में केरल पुलिस ने राष्ट्रपति का पुलिस पदक प्रदान किया.

इसके अवाला साल 2007 में एडसेरी पुरस्कार, साल 2013 में गोपालकृष्णन कोलाजी पुरस्कार, अब्दुशी शक्ति पुरस्कार, कुंजुनि पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.